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आवृतबीजी (Angiosperms)

आवृतबीजी (Angiosperms) – संक्षिप्त व्याख्या

आवृतबीजी (Angiosperms) वे पादप होते हैं जिनमें बीज फल के अंदर सुरक्षित रहते हैं और इनमें फूल (Flower) बनते हैं। ये पादप जगत (Plant Kingdom) के सबसे विकसित और विविधतापूर्ण पौधे हैं।

1. आवृतबीजी की विशेषताएँ:

बीज फलों में संलग्न होते हैं – इनमें बीज अंडाशय (Ovary) के अंदर विकसित होता है, जो बाद में फल में परिवर्तित हो जाता है।
फूलों का निर्माण – ये फूलों वाले पौधे होते हैं, जो प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
संवहनी ऊतक (Vascular Tissues) विकसित होते हैं – इनमें जाइलम और फ्लोएम अच्छे से विकसित होते हैं।
परागण के कई तरीके होते हैं – कीटों, पक्षियों, जल, वायु आदि के माध्यम से परागण होता है

एकलबीजी (Monocot) और द्विबीजपत्री (Dicot) वर्गीकरण

  • एकबीजपत्री (Monocots): जैसे गेहूँ, धान, मक्का
  • द्विबीजपत्री (Dicots): जैसे आम, गुलाब, सूरजमुखी

2. आवृतबीजी के उदाहरण:

📌 अनाज (Cereals): गेहूँ, चावल, मक्का
📌 फलदार पौधे: आम, सेब, केला
📌 सब्जियाँ: टमाटर, आलू, गाजर
📌 फूल वाले पौधे: गुलाब, सूरजमुखी, कमल

3. आवृतबीजी का महत्व:

🌾 खाद्य पदार्थों का स्रोत – अनाज, फल, और सब्जियाँ भोजन के मुख्य स्रोत हैं।
💐 सौंदर्य और सजावट – फूलों वाले पौधे बगीचों और सजावट के लिए उपयोग किए जाते हैं।
🌿 औषधीय महत्व – इनमें से कई पौधे औषधीय गुणों वाले होते हैं, जैसे तुलसी और नीम।
🌍 पर्यावरणीय योगदान – ये पौधे ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं।

निष्कर्ष:

आवृतबीजी पादपों का सबसे विकसित और विविध समूह है, जो पृथ्वी पर सबसे अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इनमें फूल, फल, बीज और उन्नत संवहनी ऊतक होते हैं, जो इन्हें सबसे सफल पौधों में से एक बनाते हैं। 🌿

अनावृतबीजी (Gymnosperms)

अनावृतबीजी (Gymnosperms) – संक्षिप्त व्याख्या

अनावृतबीजी (Gymnosperms) वे पादप होते हैं जिनमें बीज बिना फल के विकसित होते हैं, अर्थात् इनके बीज खुले (नंगे) रहते हैं और फल में संलग्न नहीं होते। ये प्राचीनतम बीजधारी पौधे हैं और मुख्य रूप से शंकुधारी (Coniferous) और सदाबहार (Evergreen) वृक्ष होते हैं।

1. अनावृतबीजी की विशेषताएँ:

बीज नग्न होते हैं – इनमें बीज फल के अंदर नहीं, बल्कि शंकु (Cone) में विकसित होते हैं।
संवहनी ऊतक मौजूद होते हैं – इनमें जाइलम और फ्लोएम पाए जाते हैं, लेकिन फ्लोएम में साथी कोशिकाएँ (Companion Cells) अनुपस्थित रहती हैं।
गैमेटोफाइट अविकसित होता है – इनमें जीवन चक्र में स्पोरॉफाइट (Sporophyte) प्रमुख अवस्था होती है।
नर व मादा शंकु (Cones) होते हैं – नर शंकु पर परागकण (Pollen) और मादा शंकु पर बीजांड (Ovule) विकसित होते हैं।
आमतौर पर बड़े और लंबे वृक्ष होते हैं – इनमें अधिकांश पौधे विशालकाय वृक्ष होते हैं, जैसे देवदार और साइकस।
परागण वायु द्वारा होता है – इनमें अधिकांश परागण (Pollination) वायु के माध्यम से होता है।
शुष्क एवं ठंडे क्षेत्रों में पाए जाते हैं – ये मुख्य रूप से पहाड़ी और ठंडे क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

2. अनावृतबीजी के उदाहरण:

📌 साइकस (Cycas) – ताड़ जैसे पत्तों वाला पौधा
📌 पाइन्स (Pinus) – शंकुधारी वृक्ष, जैसे देवदार
📌 स्प्रूस (Spruce) और फायर (Fir) – ठंडे इलाकों में पाए जाने वाले वृक्ष
📌 जिन्कगो (Ginkgo biloba) – जीवित जीवाश्म (Living Fossil) माना जाता है

3. अनावृतबीजी का महत्व:

🌲 लकड़ी और कागज उद्योग में उपयोगी – पाइन्स और स्प्रूस जैसे वृक्षों की लकड़ी से कागज, फर्नीचर और ईंधन बनाया जाता है।
🌿 औषधीय उपयोग – जिन्कगो बिलोबा का उपयोग दवाओं में किया जाता है।
🏡 सजावटी पौधे – साइकस को बगीचों में सजावटी पौधे के रूप में लगाया जाता है।
🍃 पर्यावरणीय महत्व – ये पौधे वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु संतुलन बनाए रखते हैं।

निष्कर्ष:

अनावृतबीजी वे पौधे हैं जिनमें बीज खुले रहते हैं और फल में संलग्न नहीं होते। ये प्राचीन, विशालकाय, सदाबहार एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधे हैं। 🌿🌲