थैलोफाइटा (Thallophyta) – संक्षिप्त व्याख्या
थैलोफाइटा (Thallophyta) पादप जगत (Plant Kingdom) का सबसे सरल और आदिम (Primitive) समूह है। इसमें वे पौधे आते हैं जिनका शरीर जड़, तना और पत्तियों में विभाजित नहीं होता और इन्हें थैलस (Thallus) कहते हैं।
1. थैलोफाइटा की विशेषताएँ:
✅ सरल संरचना – शरीर थैलस रूप में होता है, कोई जड़, तना, पत्ती नहीं होती।
✅ असंवहनी पौधे (Non-vascular plants) – इनमें जल और पोषक तत्वों के परिवहन के लिए विशेष ऊतक नहीं होते।
✅ आर्द्र स्थानों पर पनपते हैं – ये अधिकतर जल में या नमी वाली जगहों पर पाए जाते हैं।
✅ प्रजनन – ये अलैंगिक (Asexual) और लैंगिक (Sexual) दोनों प्रकार से प्रजनन कर सकते हैं।
✅ कोशिका भित्ति (Cell Wall) – इनकी कोशिका भित्ति सेलुलोज़ से बनी होती है।
2. थैलोफाइटा के उदाहरण:
📌 शैवाल (Algae) – ये जल में रहने वाले हरे पौधे होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
🔹 स्पाइरोगायरा (Spirogyra)
🔹 क्लोरेला (Chlorella)
🔹 लैमिनेरिया (Laminaria)
🔹 नॉस्टोक (Nostoc – नीले-हरे शैवाल)
3. थैलोफाइटा का महत्व:
🌱 ऑक्सीजन उत्पादन – शैवाल प्रकाश संश्लेषण से ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।
🌱 खाद्य स्रोत – कुछ शैवाल (जैसे स्पाइरुलीना) प्रोटीन से भरपूर होते हैं।
🌱 जैव ईंधन – शैवाल से बायोडीजल बनाया जाता है।
🌱 औषधीय उपयोग – कुछ शैवाल का उपयोग दवाइयों में किया जाता है।
निष्कर्ष:
थैलोफाइटा सबसे सरल पौधे हैं, जिनमें जड़, तना और पत्तियाँ नहीं होतीं। ये जल या नमी वाले स्थानों पर पाए जाते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 🌿
