पादप जगत (Plant Kingdom) – संक्षिप्त और सरल व्याख्या
पादप जगत (Plantae) में वे सभी जीव आते हैं जो प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। ये बहुकोशिकीय (Multicellular), स्थिर और कोशिका भित्ति (Cell Wall) युक्त होते हैं।
1. पादपों की विशेषताएँ:
✅ स्वपोषी (Autotrophic) – सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाते हैं।
✅ कोशिका भित्ति (Cell Wall) – सेलुलोज़ से बनी कठोर बाहरी परत होती है।
✅ स्थायी रूप से स्थिर (Sessile) – ये अपनी जगह से हिल नहीं सकते।
✅ जीवन चक्र में द्विआवृत्ति (Alternation of Generations) – यौन (Sexual) और अलैंगिक (Asexual) प्रजनन दोनों होता है।
2. पादपों का वर्गीकरण (Classification of Plants):
📌 (A) थैलोफाइटा (Thallophyta) – सरल और अविकसित पौधे
- उदाहरण: शैवाल (Algae) जैसे स्पाइरोगायरा, क्लोरेला
📌 (B) ब्रायोफाइटा (Bryophyta) – स्थलीय लेकिन जल पर निर्भर पौधे
- "स्थलीय पौधों के उभयचर" कहलाते हैं।
- उदाहरण: मॉस (Moss) और लीवरवर्ट (Liverworts)
📌 (C) टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) – प्रथम संवहनी पौधे
- इनमें जड़, तना, पत्तियाँ और संवहनी ऊतक (Vascular Tissues) होते हैं।
- उदाहरण: फ़र्न (Fern), सिलेजिनेला
📌 (D) अनावृतबीजी (Gymnosperms) – नग्न बीज वाले पौधे
- इनके बीज फल में नहीं ढके होते।
- उदाहरण: साइकस (Cycas), चीड़ (Pine)
📌 (E) आवृतबीजी (Angiosperms) – फूल वाले पौधे
- बीज फलों में बंद होते हैं।
- ये एकबीजपत्री (Monocots) और द्विबीजपत्री (Dicots) में विभाजित होते हैं।
- उदाहरण: आम (Mango), गेहूं (Wheat), सूरजमुखी (Sunflower)
3. पादप जगत का महत्व:
🌱 ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
🌱 भोजन, लकड़ी, औषधियाँ और कपड़ा उत्पादन में सहायक हैं।
🌱 पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं।
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