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Stomatal Transpiration and structure of stomata

वाष्पोत्सर्जन का तात्पर्य सामान्यतः रन्ध्री वाष्पोत्सर्जन से ही होता है। अतः इसका वर्णन नीचे विस्तार से किया गया है—

         रन्ध्र की संरचना (Structure of                                            Stomata)

हरे तनों तथा पत्तियों की बाह्यत्वचा पर अनेक छोटे-छोटे छिद्र पाये जाते हैं, जिन्हें रन्ध्र (stomata) कहते हैं। प्रत्येक छिद्र दो वृक्काकार (kidney shaped) द्वार अथवा रक्षक कोशिकाओं (guard cells) से घिरारहता है। द्वार कोशिकाओं की अन्दर (छिद्र की ओर) की भित्ति मोटी एवं स्थिर (non - elastic) तथा बाहर की भित्ति पतली एवं लचीली (elastic) होती है। द्वार कोशिकाओं को चारों ओर से बाह्यत्वचीय कोशिकाएँ घेरे रहती हैं, इन्हें सहायक कोशिकाएँ (subsidiary or accessory cells) कहते हैं।

        रन्धों का वितरण (Distribution of                                         Stomata)

पत्तियों में वितरण व्यवस्था के आधार पर रन्ध्र निम्नलिखित पाँच प्रकार के होते हैं —

(1) सेब तथा शहतूत प्रकार (Apple and mulberry type)- रन्ध्र केवल निचली सतह पर पाये जाते हैं; जैसे- सेब, शहतूत आदि। इस प्रकार की पत्ती को अधोरन्ध्री (hypostomatic) कहा जाता है। 
(2) आलू प्रकार (Potato type)- रन्ध्र दोनों सतहों पर पाये जाते हैं, लेकिन निचली सतह पर ऊपरी सतह की तुलना में अधिक होते हैं; जैसे-आलू, टमाटर आदि । इस प्रकार की पत्ती को उभयरन्ध्री (amphistomatic) कहा जाता है।
(3) जई प्रकार (Oat type)- रन्ध्र दोनों सतहों पर लगभग समान संख्या में पाये जाते हैं; जैसे — जई, गेहूँ आदि। इस प्रकार की पत्ती को भी उभयरन्ध्री कहा जाता है।
(4) वाटरलिली प्रकार (Waterlily type)- रन्ध्र केवल ऊपरी सतह पर ही पाये जाते हैं; जैसे— वाटरलिली, निम्फिया (Nymphaea) आदि इस प्रकार की पत्ती को अधिरन्ध्री (epistomatic) कहा जाता है।
(5) पोटेमोजीटोन प्रकार (Potamogeton type)- रन्ध्र या तो अनुपस्थित या कार्यहीन (non functional) होते हैं; जैसे—पोटेमोजीटोन (Potamogeton) तथा अन्य जलनिमग्न जातियाँ।

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