जीवों का वर्गीकरण (Biological Classification) – संक्षिप्त व्याख्या
पृथ्वी पर लाखों प्रकार के जीव मौजूद हैं, जिनका अध्ययन आसान बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने इन्हें वर्गीकृत (Classify) किया है। इसे "जीवों का वर्गीकरण" (Biological Classification) कहते हैं।
1. वर्गीकरण का महत्व:
- जीवों को व्यवस्थित ढंग से समझने में मदद करता है।
- विभिन्न जीवों के बीच समानताएँ और अंतर स्पष्ट होते हैं।
- नई प्रजातियों की खोज और अध्ययन आसान बनता है।
2. जीवों की वर्गीकरण प्रणाली:
(A) द्विनामी नामकरण (Binomial Nomenclature)
- वैज्ञानिक नाम कार्ल लीनियस (Carl Linnaeus) ने दिए।
- प्रत्येक जीव का नाम दो शब्दों में होता है:
- पहला – वंश (Genus) (पहला अक्षर बड़ा)
- दूसरा – जाति (Species) (पूरा नाम छोटा)
- उदाहरण: Homo sapiens (मनुष्य), Panthera tigris (बाघ)
(B) पाँच जगत प्रणाली (Five Kingdom Classification) – R.H. Whittaker (1969) द्वारा
- मोनेरा (Monera) – एककोशिकीय, नाभिक रहित जीव (Bacteria)।
- प्रोटिस्टा (Protista) – एककोशिकीय, नाभिक वाले जीव (Amoeba, Paramecium)।
- फंजाई (Fungi) – कवक, अपघटक जीव (Yeast, Mushroom)।
- प्लांटी (Plantae) – हरे पौधे, प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
- ऐनिमेलिया (Animalia) – सभी जंतु, जो पोषण के लिए अन्य जीवों पर निर्भर हैं।
(C) वर्गीकरण के प्रमुख समूह (Taxonomic Hierarchy):
(बड़े से छोटे क्रम में)
- डोमेन (Domain)
- राज्य (Kingdom)
- संघ (Phylum) या गण (Division - पौधों के लिए)
- वर्ग (Class)
- गण (Order)
- कुल (Family)
- वंश (Genus)
- जाति (Species) – सबसे छोटा समूह
3. वर्गीकरण का महत्व:
- जीवों को वैज्ञानिक रूप से पहचानने और संरक्षित करने में मदद करता है।
- विकासवाद (Evolution) को समझने में सहायक होता है।
- जैव विविधता (Biodiversity) के अध्ययन को सरल बनाता है।
निष्कर्ष:
जीवों का वर्गीकरण एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जो हमें पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों को समझने और उनका सही तरीके से अध्ययन करने में मदद करती है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें